हमारे स्वास्थ्य में रसोई का विशेष योगदान होता है ,यदि रसोई में मौजूद मसालों और अन्य खाद्य पदार्थों का सही मात्रा और उचित उपयोग किया जाए तो ,बढ़िया स्वाद के साथ बढिया स्वास्थ्य भी प्राप्त किया जा सकता है

शुक्रवार, 15 मार्च 2013

कहीं आपका परिवार कुपोषण का शिकार तो नहीं


एक गृहिणी होने के नाते हमारा ये कर्तव्य है के हम ध्यान रखें के हमारे परिवार को उचित पोषक तत्व मिल पा रहे है या नहीं ,कहीं हमारे परिवार के सदस्य कुपोषण के शिकार तो नहीं हो रहे ,ये एक भ्रान्ति है के गरीब लोग ही कुपोषण का शिकार होते है यदि ध्यान से देखा जाए तो सब सुख सुविधाओ से परिपूर्ण घरों में भी कुपोषित सदस्य मिल जाते है ,क्या हम अधिक पैसे खर्च करके भी अपने परिवार को वो भोजन तो नहीं परोस रहे जिस में पोस्क तत्वों की कमी है आइये जानते है इस बारे में :-

बीते हुये  माह के भोजन की सूचि बनाइए (जितना याद आ सके )
उन सब ही खाद्य पदार्थों के पोषक तत्वों के बारे में उन के सामने लिखिए और विश्लेष्ण कीजिये के आप ने कितने दिन अपने परिवार को पोषक तत्वों से भरपूर भोजन दिया आप ने !

 भोजन में क्या खाया जाये जिस से  शरीर को सब ही पोषक तत्व मिल सके 
आइये इस के लिए भी एक लिस्ट बनाते है 
आटा 
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जहाँ तक हो सके आटा ताज़ा पिसा ही लेना चाहिए 
हम लोग अक्सर बड़े बड़े नाम वाली कम्पनियों का महँगा  आटा खरीद कर ले  है ये सोच कर के 
ये आटा हमारे परिवार के लिए अच्छा होगा  पर असल में ऐसा होता नहीं है ,पहली बात तो ये के आटा जितना पुराना होता है उस में पोषक तत्व उतने ही कम होते जाते है ये ही कारण  था के पहले घर में हाथ की चक्की से आटा सुबह पिसा जाता था और शाम तक खत्म कर लिया जाता था ,दुसरे दिन के लिए फिर दूसरी सुबह ही आटा  पिसा जाता था ,अब ये तो संभव नहीं है किन्तु हमे प्रयास करना चाहिए के आटा एक सप्ताह या १ दिन से ज्यादा पुराना न हो बेहतर ये ही रहेगा के खुद जाकर चक्की से आता पिसवा कर लाये  उस में गेंहूँ के साथ थोडा चना और जौ भी जरुर डाले इन दोनों की मात्रा १ ० किलो आटे में आधा किलो काले चने और आधा किलो जौ  ही रखनी चाहिए ज्यादा होने पर स्वाद में फर्क आ जाता है और रोटी का स्वाद बदल जाता है ,आटे का बुर बिलकुल भी नहीं निकलना चाहिए बुर में ही  अधिक पोषक  तत्व होते है ( बाजार में पैकेट में मिलने वाले आटे  का बुर भी निकल लिया जाता है जो की दवाइयां बनाने में काम आता है !

सब्जियाँ 
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आइये अब देखते है के कौन कौन सी सब्जियां हमे निरंतर इस्तेमाल करते रहना चाहिए पोषक तत्व पाने के लिए 
मौसम में मिलने वाली लगभग हर सब्जी हमे खानी चाहिए ,कुछ घरों में देखा गया है बच्चे आलू की ही सब्जी खाते है या कोई विशेष दाल ही खाते है ,हरी सब्जियां बिलकुल नहीं खाते , ये गलत है सहज बाव से बच्चों को रोज बताते रहना चाहिए ले शरीर  को पोषक तत्वों की जरूरत होती है और वो भोजन से ही मिलती है,थोडा कम खा लें किन्तु हर सब्जी खानी चाहिए 
 सप्ताह  में एक दिन पालक अवश्य बनाये ,ये हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्क है यदि ऐसा न कर पाए तो विकल्प के तौर पर मेथी /सरसों /चौलाई या कोई अन्य  हरे पत्तों वाली सब्जी सप्ताह में एक बार अवश्य खाए 
घिया या तौरी भी सप्ताह में एक बार जरुर खानी चाहिए 
भिड़ी और सीताफल (पेठा ) हमारी आँतों की सफाई भी करते है और केल्शियम के भी अच्छे स्रोत है इस लिए सप्ताह में एक बार अवश्य खाए 

चटनियाँ और सलाद 
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भोजन में इन का समावेश अत्यंत आवश्क है ,इन्हें कभी भी न भूलें 
खाने के साथ प्याज /टमाटर /चकुंदर /खीरा /ककड़ी /मुली इन में से कोई भी दो चीजे अवश्य हों,यदि  नहीं तो समझ लें के आप के परिवार को पोषक तत्वों के एक बहुत ही अच्छे स्रोत से वंचित रहना पड़ गया है 
सप्ताह में एक दिन धनियाँ की चटनी ,एक दिन पुदीने की चटनी और एक दिन नारियल की चटनी अवश्य दे 
ध्यान दें निम्बू,ईमली ,टमाटर ,और आम इन  में से कोई भी एक ही खटाई एक बार में इस्तेमाल करें दो खटाई 
एक साथ खाने से वे धीमे जहर का काम करती है और कई रोग पैदा करती है 
दालें 
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छिलके वाली दालें  अवश्य खाए ,अगर हो सके तो एक वक्त सब्जी और एक वक्त दाल खानी चाहिए ,एक ही दाल को पुरे सप्ताह न दोहराए बल्कि रोजाना अलग अलग दाल खाए ,जैसे एक दिन अरहर ,एक दिन मुंग एक दिन मसूर ,,कभी सब दालें  मिक्स करके भी बनाये इस कर्म को दोहराते रहने से शरीर को सब ही पोषक तत्व सही मात्रा  मिल जाते है राजमा,उरद कम ही खाने चाहिए 

नमक 
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पहले एक डली वाला नमक (साबुत नमक ) आता था,अब भी मिल जाता है पर थोडा खोजना पड़ता है बाजार में 
इस का प्रयोग दाल और सब्जी में किया जा सकता है इस से हमे काफी मिनरल्स मिलते है जो की नमक  को पिसे जाने पर नष्ट हो जाते है ,किन्तु पिसे नमक में आयोडिंन मिलाया जाता है वो भी हमारे शरीर के लिए जरुर है इस लिए दोनों ही प्रकार के नमक का उपयोग करें यदि महीने में २ किलो नमक इस्तेमाल  होता है टी एक किलो पिसा नमक  और एक किलो साबुत नमक लेंऔर काला नमक तथा सेन्दा(लाहोरी ) नमक भी कभी कभी खाते रहना चाहिए  इसे हम सलाद या रायते में डाल  सकते है( इन में अलग प्रकार के नमक मिलते है जो सादे नमक में नहीं होते  ! 

खाने के बाद लिए जाने वाले पदार्थ जैसे सौफ,इलायची या मिश्री भी पोषक तत्वों से भरपुर होती है इसलिए इन का भी इस्तेमाल अवश्य करें !

दही और दूध भी उचित मात्रा  में जरुर उपयोग करें दही के रायते  में प्याज या निम्बू या टमाटर नहीं डाले 

पिजा और मैगी /नूडल्स से हमारे शरीर को कोई पोषक तत्व नहीं मिलते ,इन का प्रयोग कम से कम करें 
खाना जितना ताज़ा होता है उतना ही पोष्टिक होता है बासा  खाना सिर्फ पेट भरता है उस से शरीर को पोषक तत्व नहीं मिलते !

खाना बनाने के तेल 
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सरसों का तेल  सब से अच्छा  होता है खाना बनाने के लिए ,पर सब ही पोषक तत्व मिले इस के लिए जरूरी है कई प्रकार के तेल इस्तेमाल किये जाए जैसे :- यदि हर माह आप पाँच लिटर तेल उपयोग करती है खाना बनाने में तो ३ लिटर सरसों का तेल २ लिटर सोयाबीन या कोई अन्य तेल जैसे राईस ब्रान आयल ,तिल  का तेल ,नारियल का तेल ,कहने का अभिप्राय ये है के कई प्रकार के तेल खाने में इस्तेमाल करने चाहिए सूरजमुखी का तेल भी ले सकते है किन्तु से पचने में थोडा भारी  होता है जो लोग इसे पचा पाते  हों उन्हें ही इसे इस्तेमाल 
करना चाहिए! 
 देशी घी 
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आजकल घी से बहुत डराया जाता है ,फेट होता है शरीर के लिए नुक्सान दायक है इत्यादि किन्तु ये आधा सच है ये शरीर  के लिए नुकसानदायक तब है जब हम में फेट की मात्रा अधिक हो किन्तु बच्चों के बढ़ते  शरीर को फेट की एक उचित मात्रा  की जरुर होती है जो घी से पूरी की जा सकती है ,रोटी में लगा कर ,आटे का हलवा या किसी अन्य पदार्थ में डालकर घी उचित मात्र में बच्चो को अवश्य दें हाँ एक उम्र के बाद इस का इस्तेमाल सोच समझ कर बहुत कम मात्रा  में करें 

उपर दिए गए लेख से अपने खाने की तुलना करने पर आप समझ जाएगी के आप अपने परिवार को उचित और सही पोषक तत्व दे पा रही है या नहीं यदि आप अपने भोजन में इन सब पदार्थों का समावेश करती है तो बधाई ,आप एक सुघड़ गृहणी है और अपने परिवार को सही पोष्टिक भोजन दे कर सही पोषित कर रही है यदि ऐसा नहीं है तो निराश न हों और  से ही अपने भोजन में इन सब  का उचित समावेश कीजिये और अपने परिवार को कुपोषित होने से  बचायें ! 



(अवन्ती सिंह )




सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

खट्टे पदार्थ



हम लोगों के यहाँ यानि भारत में  पहले जो भोजन बनाया जाता था वो आयुर्वेद की दृष्टि से स्वास्थ के लिए हितकर था और शरीर के लिए उत्तम था किन्तु जब से हम लोगों के भोजन पर पाश्चात्य देशों में बनाये जाने वाले भोजन का असर आने लगा है हम लोग भोजन की गुण धर्मिता  के बारे में भूलने लगे है कुछ पदार्थ एक दुसरे के साथ नहीं खाए जा सकते जैसे दूध और मुली ,प्याज  और दूध इस के बारे में हम सब जानते है किन्तु आयुर्वेद में किसी भी खटाई को एक साथ खाना भी मना है इस बारे में लोगों की जानकारी कम है पहले नानी या दादी इस बारे में कहा करती थी पर अब लगभग ये ज्ञान विलुप्त हो चुका  है,कुछ ही लोग इस बारे में जानते है !

निम्बू ,टमाटर ,इमली और आम और दही  ये मुख्य  खट्टे पदार्थ है जिन्हें   हम अपने भोजन को खटास देने के लिए उपयोग में लाते है इन में से किसी भी पदार्थ को एक साथ उपयोग में लेन पर ये धीमे जहर का काम करते है और हमारे शरीर में कई रोग भी उत्पन्न करते है इन का असर इतना धीमा होता है के हम जान भी नहीं पाते  के खाने विषमता के कारण  हम  रोग से ग्रसित हुए है हर कुशल गृहणी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए और इन में से किसी भी खटाई  का एक साथ उपयोग नहीं करना चाहिए और आने वाली पीढ़ी को भी ये जानकारी देनी चाहिए ,आजकल बाहर बनाये जाने वाले खानों में इस का ध्यान नहीं रखा जाता यहाँ तक के कई प्रसिद्ध कुकरी शो /किताबों में भी 2 या 3 तरह की खटाई  का एक साथ उपयोग दर्शाया जाता है ये बिलकुल गलत है और हानिकारक है  इस पर अमल करने  से बचे और अपने परिवार  के स्वास्थ्य की रक्षा करें 

मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

मेथी




मेथी में फॉस्फेट, लेसीथिन, विटामिन डी और लौह अयस्क होता,मेथी का कडवापन उस में मौजूद एक  पदार्थ 'ग्लाइकोसाइड' के कारण होता है!  मेथी के दाने न सिर्फ शरीर को आंतरिक रूप से मजबूत करते हैं बल्कि शरीर को बाहरी सुंदरता देने में भी सहायक हो सकते हैं। मेथी के दानों को पीसकर यदि त्वचा पर लगाया जाए तो यह सुंदर और मुलायम बनती है। इसका प्रयोग घाव और जलने के इलाज में भी किया जाता है। पुराने समय में बच्चे के जन्म को आसान बनाने के लिए गर्भवती स्त्री को मेथी खिलाई जाती थी

गठिया और जोड़ों के किसी भी प्रकार के दर्द में मेथी दाना राम बाण है !
इस के लड्डू बनाकर खाए या मेथी के कुछ दाने रोजाना भिगो कर खाए !

मेथी में ऐसे पाचक एंजाइम होते हैं, जो अग्नाशय को अधिक क्रियाशील बना देते हैं। इससे पाचन क्रिया भी सरल हो जाती है। यह गैस्ट्रिक अल्सर के उपचार में भी उपयोगी है। मेथी के स्टेरॉइडयुक्त सैपोनिन और लसदार रेशे रक्त में शकर को कम कर देते हैं, इसलिए मेथी का सेवन मधुमेह के रोगियों के लिए भी लाभदायक होता है। मेथी को यदि कुछ मात्रा में रोज लिया जाए तो इससे मानसिक सक्रियता बढ़ती है। साथ ही यह शरीर के कोलेस्ट्रॉल के स्तर भी घटता है
हरी पत्तेदार सब्जियों में मेथी एक ऐसी सब्जी  है जो स्वास्थ्य और सौन्दर्य दोनों की दृष्टि लाभकारी,गुणकारी है 
अपच ,उच्च रक्तचाप ,मधुमेह ,जोड़ों के दर्द ,एसिडिटी ,अफरा ,इन सब में मेथी के सेवन से काफी लाभ मिलता है 
महिलाओं की अनेक समस्याएं मेथी दाना खाने से दूर होती है 
मेथी दाना को रोजाना भिगो कर खाने से कुछ ही महीनो में चेहरे पर चमक आ जाती है 
हमारे शरीर की आयरन की कमी भी मेथी से दूर होती है 
मेथी के उपयोग से पाचन सही से होता है और भूख भी खुल के लगती है  

 अंकुरित मेथी दाने में कैंसर को नियंत्रित करने वाली विटामिन बी १७ भी विशिष्ट मात्र में पाया जाता है.

  इसके पत्तों का उपयोग सब्जी बना कर किया जाता है जो बहुत ही पौष्टिक और सुपाच्य होती है. इसके पत्तों को सुखा कर भी इसका प्रयोग किया जाता है.

बुधवार, 28 मार्च 2012

पानी

शीर्षक पढ़ कर आप के चेहरे पर मुस्कान आ जाएगी के पानी के बारे में अवन्ती क्या बताएगी ,सब जानते ही है पानी के  गुण,शायद आप ठीक भी है पर कुछ बातें हम जानते हुए भी उनका पालन नहीं करते उन ही बातों को दोहरा रही हूँ एक दो बात शायद नई भी हो

पीने का पानी स्वच्छ  होने के साथ में ताज़ा भी होना चाहिए ,यानी के बहुत दिनों से भर कर रखे गए पानी को नहीं पीना चाहिए ,और यदि पीना पड़ भी जाये तो दो ग्लास ले और एक गिलास से दुसरे ग्लास में ऐसे पलटे पानी को जैसे दूध ठंडा करने के लिए पलटते है ,उससे पानी हवा के सम्पर्क में आएगा और आक्सीजन उस में मिलेगी जिससे उस का गुण बड़ेगा
सुबह उठकर एक गिलास पानी जरुर पीये और बिना ब्रश किये पीये, ब्रश रात को करके सोये
जब हम रात भर सोते है तो हमारे मुह में बनने वाली राल  हमारे मुह में जमती रहती है और वो राल हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरूरी होती है ,आयुर्वेद में ये कहा गया है के जो लोग सुबह बिना कुल्ला किये एक ग्लास पानी पी लेते है उन्हें कब्ज और पेट की कई बीमारियों से निजात मिल जाती है ,जिन्हें एसिड बनता हो वो इस प्रयोग को जरुर करें

एक महत्व पूर्ण प्रयोग
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पानी को हल्का गर्म करके पीये और बहुत ही छोटी घूंट भरे ,हर घूंट को आधा मिनट मुह में रखें और उसे मुह में धुमाते रहें ,ऐसा करने से हर घूंट के साथ काफी मात्र में लार बनकर हमारे पेट में पहुंचेगी ,यदि हम एक ग्लास पानी भी इस तरह पी लेगें तो अनेक गम्भीर बिमारिओं से बचेगे,इस  प्रयोग से मोटापा भी कम होता है
अपने बच्चों को ऐसे पानी पीने की आदत डाले  ,

पानी को कभी भी  खड़े होकर न पीये ,खड़े होकर पानी पीने वालों को कमर ,कंधे और रीढ़ की हड्डी की बीमारी अधिक होती है ,यदि कभी खड़े होकर पानी पीना भी पड़े तो जब तक पानी पिए  पंजों के बल खड़े रहे

शनिवार, 24 मार्च 2012

हरी मिर्च

हरी मिर्च का नाम सुनते ही कुछ लोगों को उस का तीखापन याद करके पसीने आ जाते है तो कुछ के मुंह में पानी 
हरी मिर्च को यदि तरीके से खाया जाए यानी की उचित मात्र में खाया जाये तो वो औषधि का भी काम करती है आइये जानते है कैसे 

गर्मी के दिनों में यदि हम खाने के साथ हरी मिर्च खाए और फिर घर से बाहरजाए तो कभी भी लू नहीं लग सकती !
 खून में हेमोग्लोबिन की कमी होने पर  रोजाना खाने के साथ हरी मिर्च खाए कुछ ही दिन में आराम मिल जायेगा 

 मिर्च में अमीनो एसिड, एस्कार्बिक एसिड, फोलिक एसिड, सिट्रीक एसिड, ग्लीसरिक एसिड, मैलिक एसिड जैसे कई तत्व होते है जो हमारे स्वास्थ के साथ – साथ शरीर की त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद होता है

  मिर्च के सेवन से भूखं कम लगती है और बार बार खाने की इच्छा नहीं होती जिससे वजन बढ़ने का खतरा कम हो जाता है।

लाल मिर्च में भी औषधीय गुण होते है किन्तु हरी मिर्च सेहत के लिए अधिक लाभकारी है

खाने के साथ,चटनी में या हरी मिर्च का अचार बना कर हम इस का उपयोग कर सकते है

मिर्च का अचार तो लगभग सब ने ही खाया होगा किन्तु मिर्च के  रायता के बारे में कम ही लोग जानते होगे आइये बनाते है मिर्च का रायता


सामग्री :
200 ग्राम दही, 8-10 हरी मिर्च,  नमक( स्वाद अनुसार ),
1 छोटा चम्मच  राई (पिसी हुई)

विधि :
हरी मिर्चों को उबालकर पानी से निकालकर पेस्ट बना लें। दही में आधा टी स्पून नमक डालकर अच्छी तरह फेंट लें।
फेंटी हुई दही में हरी मिर्च का पेस्ट और राई पाउडर को अच्छी तरह मिलाकर सर्व करें।
(दही में मिर्च का तीखापन कम हो जाता है और औषधीय गुण बरकरार रहते है)

 




शुक्रवार, 16 मार्च 2012

धनिया




शायद ही ऐसा कोई भारतीय होगा जो धनिये के नाम से परिचित ना हो ,हम सब लोग ही सब्जी और चटनी में धनिये का उपयोग करते आये है धनिये के स्वाद से और इसकी महक से तो सब ही परिचित है ,आइये इसके गुणों पर भी एक नज़र डाल लेते है!

धनिये में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है !
  फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, खनिज पदार्थ, जैसे- कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन, थियामीन, पोटोशियम और विटामिन सी भी  पाया जाता हैं।

धनिये  की चटनी का नियमित उपयोग हमारी आँखों 
के लिए बहुत ही लाभदायक है !  

धनिया भूख बढ़ता है ,तथा इससे पाचनशक्ति मजबूत होती है ! 


धनिए को एंटी डायबिटीक प्लांट भी कहा जाता है।


थाईराइड सम्बन्धी किसी भी तरह  के रोग में दवाओं के साथ-२ रोजाना हरे धनिये की चटनी बिना नमक-मिर्च के लगातार चार महीने तक सेवन करे ,( रोजाना २ चम्मच चटनी अवश्य खाएं )

शोध बताते है की मधुमेह (शुगर) में भी धनिये के उपयोग से काफी आराम मिलता है !

रोजाना धनिये (हरा धनिया ) का उपयोग करने वालों में किडनी की समस्या ना के बराबर होती है !
पेशाब संबंधी दिक्क्त में धनियां अधिक यूज़ करें ,पेशाब खुल कर आएगा ,और बार बार पेशाब जाने की दिक्क्त भी दूर होगी !

धनिया के सूखे बीज को पानी में उबाल कर छान लें और ठंडा करें। इस पानी को पीने से कोलेस्ट्राल कम करने में मदद मिलती है। 


( धनिये को आप अनेक तरह से इस्तेमाल कर सकते है ,चटनी बनाएं ,सब्जी दाल में ऊपर से डालेँ !धनिये का पराठा बनाये या आलू के पराठे में ही धनिया डालेँ ,धनिये को रायते में डालेँ ! हर चीज का स्वाद बड़ा देता है धनियां )

जिन लोगों को एसिडिटी ( तेज़ाब ) बनती हो वे धनिएं को धो कर सुख लें और चूर्ण बना लें ,एक हिस्सा धनियां ,दो हिस्से मिश्री दाल कर सम्भल कर रखें जब भी एसिडिटी लगे  ये चूर्ण आधा चम्मच ले  लें ! 

जिन लोगों को नकसीर छुट जाती हो उन्हें हरे धनिये का काफी ज्यादा उपयोग करना चाहिए  !


मासिक धर्म अधिक आने पर धनिया बीज को पानी में उबाल कर ,छान कर ठंडा कर ले और सुबह शाम पीये !

 उम्मीद है धनिये के इतने सारे गुण जानने के बाद आप सब नियमित रूप से धनिये का उपयोग करेगे......

सोमवार, 12 मार्च 2012

जीरा

जीरा वैसे तो रसोई में काम आने वाला एक साधारण सा मसाला है ,
लेकिन इस के गुण जानकर आप इसे साधारण नहीं  कह  पायेगे 

 अपच ,पेट फूलना ,भोजन में अरुचि  में जीरे का सेवन लाभदायक होता है !

बवासीर में जीरे को मिश्री के साथ खाने से कुछ आराम मिलता है 

जीरा कृमिनाशक भी है !


 डायबिटीज- ब्लड में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए आघा छोटा चम्मच पिसा जीरा दिन में दो बार पानी के साथ पीएं। डायबिटीज रोगियों को यह काफी फायदा पहुंचाता है।

नींद न आने यानि अनिद्रा का  रोग  होने पर आधा चम्मच भुना जीरा एक पके केले के साथ खाए


 अनीमिया के शिकार व्यक्ति को २ चुटकी जीरा  सादे पानी के साथ देने से आराम मिलता है ,९० दिन इस का प्रयोग अवश्य करें

छाछ में भुना जीरा ,पीसी काली मिर्च और काला नमक बुरक कर रोजाना सेवन करने वाले इंसान को पेट का कोई रोग नहीं सताता ,पाचन शक्ति एकदम दुरुस्त रहती है ,पेट के कृमि भी मर जाते है


जीरे में कैंसर की रोकथाम करने की शक्ति है।

 पानी में जीरा डालकर उबालें,ठंडा करें। इस पानी से मुंह धोने से  चेहरा साफ और चमकदार होता है।जीरा डाल कर उबाले हुए पानी से  स्नान करने पर शरीर की बदबू और खुजली से भी छुटकारा मिलता है


महिलाओं के लिए विशेष
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प्रसूति के बाद जीरे के सेवन से गर्भाशय की शुद्धि होती  है 


यदि प्रसूति के बाद शिशु के लिए पर्याप्त दूध न बन रहा हो तो बहुत
कारगर उपाय है के २५० ग्राम जीरे और १०० ग्राम मिश्री को बारीक पीस लें आधा-२ चम्मच
सुबह शाम दूध के साथ पिए तो शिशु के लिए पर्याप्त मात्रा में दूध बनने  लगेगा


  महिलाओं में श्वेत प्रदर की शिकायत आम बात है ,इस के लिए २ चुटकी जीरा दिन में २ बार  खूब चबा कर खाए  ,  ७ दिन इस प्रयोग को जारी रखें
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कहिये बदल गयी ना,जीरे के बारे में आप की राय :) :)